गणपत जाट (Ganpat Jaat) एक राजस्थानी गायक कलाकार हैं, वो राजस्थानी भाषा में भजन और गाने गाते हैं। गणपत जाट नागौर जिले के रहने वाले हैं, उन्होंने मुख्यतः लोक देवता वीर तेजाजी पर भजन गाए हैं। गणपत जाट ने अब तक 1 दर्जन से ज्यादा भजन गाए हैं। गणपत जाट के प्रसिद्ध गाने हैं- तेजल सुरवो, जाट नाचे, पियाजी भरस्या, नन्दल रा भीर और आवे रे म्हारो बेनीवाल हैं। गणपत जाट ने गायक बनने के लिए काफी संघर्ष किया हैं, आज हम इस लेख में गणपत जाट के जीवन परिचय (Biography of Ganpat Jaat) के बारे में बताने जा रहे हैं।
गणपत जाट (Ganpat Jaat) का जन्म 30 जून 1998 को राजस्थान के नागौर जिले में हुआ था, उनके गांव का नाम बाराणी हैं, जो नागौर में ही आता हैं। गणपत जाट के पिता का नाम मदन राम हैं, जो एक किसान हैं। उनकी माता का नाम गंगा देवी हैं और वो एक गृहणी हैं। गणपत जाट विवाहित हैं और उनकी पत्नी का नाम जेठी देवी हैं और इनके एक बच्चा भी हैं, जिसका नाम गौतम कृष्णा हैं। गणपत जाट के भाई का नाम सीताराम जाट हैं और उनकी तीन बहनों के नाम सीपू, बिरजू और प्रियंका हैं। गणपत जाट एक किसान परिवार से आते हैं। यह खुद वर्तमान में गायन के साथ-साथ खेती भी करते हैं।
गणपत जाट (Ganpat Jaat) की प्रारंभिक शिक्षा उनके गांव बाराणी से ही हुई हैं। गणपत जाट ने 12 वीं की पढ़ाई नागौर की सेंट जेवियर्स स्कूल से की हैं। गणपत जाट बचपन से ही संगीत प्रेमी रहे हैं और उन्होंने स्कूल के समय भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कई बार अपने गायन की प्रस्तुति दी थी। साल 2015 में 12 वीं की पढ़ाई के बाद गणपत जाट ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए फर्नीचर का काम सीखना शुरू कर दिया, इसके लिए वो कर्नाटक गए और वहां फर्नीचर का काम भी करना शुरू कर दिया। इसके बाद गणपत जाट इंदौर, पुणे, अहमदाबाद, उदयपुर और केरल में जाकर फर्नीचर का काम किया।
गणपत जाट (Ganpat Jaat) देश के कोने-कोने में नौकरी करने गए, लेकिन उन्होंने अपनी संगीत की कला को नहीं छोड़ा। फर्नीचर का काम करते-करते वो अपना कुछ समय संगीत को भी देते थे। साल 2017 में गणपत जाट अपने गांव आए हुए थे, इस दौरान उन्होंने पहली बार बड़े स्टेज पर अपनी प्रस्तुति दी और वो भी राजस्थान के मुख्य कलाकार गजेंद्र अजमेरा के साथ। बाड़मेर जिले के बायतु में खेमा बाबा के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम रखा गया था और इसी कार्यक्रम में गणपत जाट को पहली बार एक बड़ा मौका मिला।
साल 2017 में ही गणपत जाट (Ganpat Jaat) ने दूसरा बड़ा स्टेज प्रोग्राम बीकानेर में करणी माता के ससुराल साठिका (बीकानेर) में किया, इस दौरान उन्हें यह मौका गायक अनिल सैन और गजेंद्र राव ने दिया। गणपत जाट की परफॉर्मेंस को देखकर अनिल सैन काफी प्रभावित हुए और उन्हें अपना शिष्य बन लिया। गणपत जाट अपना संगीत गुरु अनिल सैन को ही मानते हैं। 24 दिसम्बर 2017 को गणपत जाट ने अपना पहला भजन रिकॉर्ड किया, जो जोशियाद भोमिया जी का था, उस भजन का नाम था- आओनी आओनी म्हारा जोशी दादा।
गणपत जाट ने अपना दूसरा गाना 2 फरवरी 2018 को नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर रिकॉर्ड किया, उस गाने का नाम था- आवे रे म्हारो बेनीवाल। इस गाने ने गणपत जाट का जीवन बदल दिया, यह गाना इतना फेमस हुआ कि नागौर और आस-पास के क्षेत्रों में गणपत जाट काफी लोकप्रिय हुए। यह समय था जब हनुमान बेनीवाल की राजनीति राजस्थान में काफी चरम पर थी और इसी समय गणपत जाट का यह गाना आना। इस गाने के बाद गणपत जाट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, उन्होंने ठान लिया कि अब संगीत के क्षेत्र में ही काम करना हैं।
गणपत जाट (Ganpat Jaat) ने फिर एक के बाद एक कई हिट गाने दिए। साल 2019 में उनका हिट सॉन्ग 'तेजल चौधरी', साल 2020 में हिट सॉन्ग था 'जाट नाचे', उसके बाद साल 2021 में हिट सॉन्ग 'तेजल सुरवो'। इस साल भी गणपत जाट ने कई गाने गाए हैं, इनमें मुख्य लीलण लाडली, पियाजी भरस्या मायरियो, नन्दल रा भीर, पेमल जाटणी, थारी म्हारी लव स्टोरी। वर्तमान में गणपत जाट चुरू के रहने वाले भागीरथ खीचड़ के साथ काम करते हैं।
साल 2019 में गणपत जाट (Ganpat Jaat) की सोशल मीडिया के जरिये भागीरथ खीचड़ से मुलाकात हुई थी, वो चुरू के रहने वाले हैं। भागीरथ खीचड़ भी संगीत से जुड़े हुए हैं। दोनों मिलकर ही अब साथ में काम करते हैं।भागीरथ खीचड़ मुख्यतः गाने लिखते हैं और गणपत जाट गायन का काम करते हैं। इस जोड़ी ने साल 2022 में कई हिट सॉन्ग दिए हैं। अब हम गणपत जाट से जुड़ी हुई अन्य जानकारियां नीचे सारणी में देने जा रहे हैं, इसके अलावा उनकी फोटोज़ और उनके मुख्य गानों की लिंक भी साझा कर रहे हैं।























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